पालघर/वाडा: ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं में छिपी प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें आधुनिक कौशल से लैस करने के उद्देश्य से ‘शिवा’ (Shri Harihar Indian Village of Art & Agriculture – SHIVAA) द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक पहल की गई है। पालघर जिले के वाडा तालुका अंतर्गत आने वाले घोडमाळ गांव स्थित भव्य ‘शिवा’ कैंपस में ग्रामीण बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष ‘समर कैंप’ (ग्रीष्मकालीन शिविर) का भव्य आयोजन किया गया। इस अनूठे शिविर में आस-पास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। इस आयोजन को जमीनी स्तर पर सफल बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने के पीछे ‘शिवा’ संस्था के फाउंडर (संस्थापक) श्री पुरुषोत्तम शर्मा जी एवं को-फाउंडर (सह-संस्थापक) श्रीमती रूचि शर्मा जी की दूरदर्शी सोच, कड़ी मेहनत और सेवा भावना है। उनके कुशल नेतृत्व में यह संस्था पिछले लंबे समय से लगातार धरातल पर उतरकर काम कर रही है और ग्रामीण व आदिवासी पृष्ठभूमि के बच्चों के कल को बेहतर तथा आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प में पूरी निष्ठा से जुटी हुई है।
इस विशेष समर कैंप के दौरान बच्चों को पारंपरिक स्कूली शिक्षा से हटकर उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने वाली विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ सिखाई गईं। शिविर में मुख्य रूप से कंप्यूटर प्रशिक्षण (Computer Training) पर विशेष जोर दिया गया ताकि ग्रामीण बच्चे डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना कर सकें और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही, बच्चों में टीम वर्क, आपसी सहयोग और शारीरिक तंदुरुस्ती की भावना को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न खेल-कूद (Games & Sports) आयोजित किए गए। साथ ही उनकी कल्पनाशीलता को नए पंख देने के लिए कला, शिल्प और चित्रकला (Art & Craft) की विशेष कार्यशालाएं चलाई गईं, जहाँ बच्चों ने अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया।शिविर के समापन के अवसर पर संस्थापक श्री पुरुषोत्तम शर्मा जी ने उपस्थित होकर सभी बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। इस दौरान शिविर में उत्कृष्ट और अनुशासित प्रदर्शन करने वाले मेधावी बच्चों को मुख्य अतिथियों के हाथों विशेष रूप से पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही, शिविर का हिस्सा बने सभी बच्चों को संस्था की ओर से शैक्षणिक सामग्री, स्कूल बैग और विभिन्न उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरों पर एक अनमोल मुस्कान बिखर गई। श्री पुरुषोत्तम शर्मा जी और श्रीमती रूचि शर्मा जी के मार्गदर्शन में ‘शिवा’ कैंपस द्वारा संचालित किए जाने वाले सभी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की अपनी कुछ खास और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो इसे अन्य संस्थाओं से अलग बनाती हैं।
यह संस्था आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अपनी मिट्टी, कला, संस्कृति और कृषि (Agriculture) से जोड़े रखने का एक बेहतरीन और अनूठा प्रयास करती है, जिससे बच्चे अपनी जड़ों को न भूलें। ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए ये तमाम आधुनिक कोर्सेज, समर कैंप और कौशल विकास कार्यक्रम पूरी तरह से निःशुल्क और सुलभ तरीके से आयोजित किए जाते हैं, ताकि पैसों की कमी किसी के हुनर के आड़े न आए।यहाँ बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाय व्यावहारिक और कौशल-आधारित शिक्षा (Practical and Skill-Based Learning) दी जाती है, जिससे कंप्यूटर और आर्ट जैसी विधाएं भविष्य में उनके रोजगार या स्वरोजगार का एक मजबूत जरिया बन सकें। इसके अतिरिक्त, शहरी और ग्रामीण बच्चों के बीच मौजूद डिजिटल और आधुनिक संसाधनों की दूरी (Digital Divide) को मिटाने के लिए ‘शिवा’ अपने सुसज्जित कैंपस के माध्यम से पूरी ईमानदारी के साथ एक सेतु का काम कर रहा है।
वाडा के घोडमाळ गांव में आयोजित हुआ यह समर कैंप इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन, मंच और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे भी देश के विकास में अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं। ‘शिवा’ संस्था के फाउंडर-शक्तियों का यह निस्वार्थ प्रयास पूरे समाज और क्षेत्र के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और वंदनीय है।